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Friday, July 13, 2018

कावेरी नदी ! जो साल में सिर्फ एक बार बहती है

कावेरी नदी 

सुनकर भले ही हैरानी हो लेकिन तमिलनाडु के मयावरम मैं कावेरी नदी वर्ष में सिर्फ एक वर नवरात्री के एक दिन पहले से दीपावली तक ही बहती है ,सिर्फ इतना ही नहीं नदी मैं बाढ़ भी आती है। दीपावली के बाद यह कावेरी नदी अपने आप सूख जाती है। कावेरी नदी 765 किलोमीटर का सफर तय करती है।  सुखी हुई इस नदी मैं कल कल बहते इस पानी के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में पूरे भारत वर्ष से लोग इकटठा होते हैं।


कावेरी नदी धर्मपुरी जिले  मैदानों से होकर  तमिलनाडु में प्रवेश करती है। तमिलनाडु में होगेनाक्कल शहर में आने से ठीक पहले यह होगेनाकल फॉल्स में गिर जाती  है। तीन मामूली सहायक नदियों, पालर, चिन्नार और थॉपर अपने  कावेरी में प्रवेश करते हैं, यह फिर ईरोड जिले की लंबाई के माध्यम से आगे बहती है जहां  चौड़ाई के माध्यम से चल रही भवानी नदी, इसके साथ विलीन हो जाती है। कावेरी, भवानी और आकाश गंगा (पौराणिक) नदियों का संगम भवानी, तमिलनाडु कुदुथुराई या इरोड शहर के उत्तरी हिस्से तिरुवेनी संगमम के सही स्थान पर है


 ऐसा माना जाता है की इस नदी का स्रोत अगस्त्य मुनि से जुड़ा हुआ है। कई पवित्र स्थान कावेरी के तट पर स्थित हैं। यहां का एक चमत्कार यह यह भी की कावेरी नदी के तट पर जो शिवलिंग रखा हुआ है वह हमेशा आंशिक रूप से कावेरी नदी के जल मैं डूबा हुआ रहता है। 
पश्चिमी घाट के कोडागु  लोग जो वहां के मूल निवासी है,कावेरी नदी को अपनी कुलदेवी मानते हैं। वहां के लोगों का कहना है की उनके पूर्वजों ने 2000 साल पहले एक पुल का निर्माण किया था, जिसका नाम कल्लाने बांध था। यह बांध आज भी मौजूद है। यह बांध भारत के सबसे पुराने बांधों मैं से एक है   

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