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Friday, August 31, 2018

2018 | श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव | पूजा विधि | दिनांक | मंत्र

भगवान श्री कृष्ण  ऐसे दिए हैं जिन्होंने स्त्री शक्ति की रक्षा का संदेश संसार को दिया है। भारत में लोग इनका जन्मोस्त्सव कृष्ण जन्माष्टमी के रूप मनाते हैं। और जगत को चेताया है कि स्त्री का सम्मान नहीं करेंगे तुम महान विनाश निश्चित है।  नारी और कृष्ण के  बीच मजबूत और अटूट बंधन है जो युगों युगों से चला आ रहा है सुख सागर में भगवान विष्णु के 24 अवतार कहे गए हैं जिन्हें  सनकादिक वराह अवतार नारद नर-नारायण कपिल यज्ञ ऋषभदेव पृथु  मत्स्यावतार धनवंती मोहिनी बामन नरसिंह   अवतार  इन सभी 24 अवतारों में शुराम वेदव्यास राम कृष्ण बुद्ध कलयुग का नाम दिया गया है  इन सभी 24 अवतारों में भगवान श्री कृष्ण का अवतार अकथनीय अकल्पनीय और अद्भुत है ऐसे देव हैं जो प्रेम का संदेश देते हैं उनका सम्मान और रक्षा का संदेश देते हैं भगवान श्रीकृष्ण 16 कलाओं से युक्त हैं संयुक्त माता पार्वती भी हैं जिन्हें तंत्र शास्त्र में काली द्रोपदी कमला तारा इत्यादि नामों से भी पुकारा जाता है तंत्र शास्त्र में स्पष्ट उल्लेख है कि जब माता पार्वती एवं शिव के मन में राज करने की इच्छा उत्पन्न हुई तो माता पार्वती की कृष्ण बन गई तथा भगवान  शिव भी राधा बन गई थी इसलिए काली का बीज मंत्र   कालिके नमः तथा भगवान कृष्ण का बीज मंत्र एक ही है काली की पूजा भी अष्टमी तिथि की रात्रि में की जाती है  भगवान कृष्ण की पूजा भी मध्य रात्रि 12:00 बजे की जाती है भविष्य पुराण  मैं भगवान कृष्ण ने स्वयं युधिस्टर से कहा है
कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी 

भगवान श्री कृष्ण ऐसे दिए हैं जिन्होंने स्त्री शक्ति की रक्षा का संदेश संसार को दिया है। भारत में लोग इनका जन्मोस्त्सव कृष्ण जन्माष्टमी के रूप मनाते हैं। और जगत को चेताया है कि स्त्री का सम्मान नहीं करेंगे तुम महान विनाश निश्चित है। नारी और कृष्ण के बीच मजबूत और अटूट बंधन है जो युगों युगों से चला आ रहा है भगवान विष्णु के 24 अवतार कहे गए हैं जिन्हें सनकादिक वराह अवतार नारद नर-नारायण कपिल यज्ञ ऋषभदेव पृथु मत्स्यावतार धनवंती मोहिनी बामन नरसिंह अवतार इन सभी 24 अवतारों में शुराम वेदव्यास राम कृष्ण बुद्ध कलयुग का नाम दिया गया है इन सभी 24 अवतारों में भगवान श्री कृष्ण का अवतार अकथनीय अकल्पनीय और अद्भुत है ऐसे देव हैं जो प्रेम का संदेश देते हैं उनका सम्मान और रक्षा का संदेश देते हैं भगवान श्रीकृष्ण 16 कलाओं से युक्त हैं संयुक्त माता पार्वती भी हैं जिन्हें तंत्र शास्त्र में काली द्रोपदी कमला तारा इत्यादि नामों से भी पुकारा जाता है तंत्र शास्त्र में स्पष्ट उल्लेख है कि जब माता पार्वती एवं शिव के मन में राज करने की इच्छा उत्पन्न हुई तो माता पार्वती की कृष्ण बन गई तथा भगवान शिव भी राधा बन गई थी इसलिए काली का बीज मंत्र कालिके नमः तथा भगवान कृष्ण का बीज मंत्र एक ही है काली की पूजा भी अष्टमी तिथि की रात्रि में की जाती है भगवान कृष्ण की पूजा भी मध्य रात्रि 12:00 बजे की जाती है भविष्य पुराण मैं भगवान कृष्ण ने स्वयं युधिस्टर से कहा है "मैं वासुदेव एवं देवकी से भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को उत्पन्न हुआ था जो 16 कलाएं पार्वती में विद्वान हैं मैं उन सभी से परिपूर्ण हूं इसलिए उच्चस्थ चंद्रमा में मेरा जन्म हुआ इस धरा को पापों से मुक्त करने के लिए ही मेरा जन्म हुआ है।" भगवान कृष्ण का जन्म महिलाओं की सम्मान की रक्षा के लिए हुआ था, क्योंकि राम जी का जन्म दिन में मध्यकाल दोपहर 12:00 बजे शुक्ल पक्ष में तथा दशमी तिथि को हुआ वर्ग की राशि नक्षत्र तथा तिथि है भगवान कृष्ण का जन्म कृष्ण कृष्ण पक्ष मध्य रात्रि अष्टमी को हुआ यह सभी स्त्री संज्ञक हैं। इन्हीं कारणों प्रभु का जन्म कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।



भाद्रपद कृष्ण पक्ष

भगवान कृष्ण ने जितना सम्मान महिलाओं को दिया शायद किसी भी अन्य ईश्वर अवतार में नहीं मिला।   लगन  मैं चंद्रमा वह भी रोहिणी नक्षत्र का ऐसे व्यक्ति को माता के रूप में भी अनेक स्त्रियों से मातृत्व  का प्यार मिलता है।  क्योंकि चंद्रमा की 27 पत्नियां हैं तथा गया सबसे अधिक प्यार रोशनी नाम की पत्नी से करते हैं जब किसी पुरुष की चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में बैठता है तो  उसमें से वह सभी गुण आ जाते हैं जो कृष्ण में विद्वान हैं और  वह सभी महिलाओं से सम्मान प्राप्त करता है।  इसी कारण भगवान कृष्ण ने यशोदा माता एवं देवकी प्यार पाया और एक आदर्श पुत्र हुए।  माता के  प्यार के वशीभूत उन्होंने अपनी लीला की।
भगवान कृष्ण 


भगवान कृष्ण ने जितना सम्मान महिलाओं को दिया शायद किसी भी अन्य ईश्वर अवतार में नहीं मिला। लगन मैं चंद्रमा वह भी रोहिणी नक्षत्र का ऐसे व्यक्ति को माता के रूप में भी अनेक स्त्रियों से मातृत्व का प्यार मिलता है। क्योंकि चंद्रमा की 27 पत्नियां हैं तथा गया सबसे अधिक प्यार रोशनी नाम की पत्नी से करते हैं जब किसी पुरुष की चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में बैठता है तो उसमें से वह सभी गुण आ जाते हैं जो कृष्ण में विद्वान हैं और वह सभी महिलाओं से सम्मान प्राप्त करता है। इसी कारण भगवान कृष्ण ने यशोदा माता एवं देवकी प्यार पाया और एक आदर्श पुत्र हुए। माता के प्यार के वशीभूत उन्होंने अपनी लीला की।

जन्माष्टमी पूजा विधि

जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण के पूजन के लिए लकड़ी के पट्टे पर लाल पीला या सफेद वस्त्र बिछाएं। उत्तर मुखी होकर भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल रूप की नई प्रतिमा या चित्र को आसन पर स्थापित करें। नियमानुसार और मंत्रोचार के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी का विधिवत पूजन करें।


  • उपवास की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • उपवास के दिन प्रातः काल स्नान करके नित्यकर्मों से निवृत हो जाएं।
  • इसके बाद सूर्य सोम यम काल संधि पवन दिक्पति भूमि खेचर अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख्य बैठे।
  • इसके बाद जल फल कुश और दूध लेकर संकल्प करें-
"ममखिलपापप्रशमनपूर्वकसर्वाभीष्ट सिधेय "

  • अब के समय काले तिल मिले जल से स्नान कर देवकी जी सूतिका गृह सुनिश्चित करें।
  • तत्पश्चात भगवान श्री कृष्णा की मूर्तियां चित्र स्थापित करें।
  • मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हो अथवा ऐसे भाव हो.
  • इसके बाद विधि विधान से पूजा करें मन में देवकी वसुदेव नंद यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः लेना चाहिए।
  • फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पित करें।
"प्रणवे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः।
वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तभ्यं नमो नमः।
सुपुत्रधरय प्रदत्तं में ग्रहणंम नमोस्तुते। "

  • बाद में प्रसाद वितरण करते कर भजन कीर्तन करते हुए रतजगा करें।
इस प्रकार आप कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा नियमानुसार कर सकते हैं।

यहां जन्माष्टमी पूजा विधि भी बताई गई है। लोग इन्हे राधे कृष्ण, गोपाल, मुरलीवाला, घनश्याम, मोहन, आदि नामों से पुकारते हैं। इस बार जन्माष्टमी 02-09-2018 को मथुरा में मनाई जाएगी।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पूजा विधि दिनांक मंत्र
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