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Wednesday, October 16, 2019

Facial Recognition System क्या होता है , यह कैसे काम करता है। हिंदी में जाने ?

            फेसिअल रिकग्निशन सिस्टम




फेसिअल रिकग्निशन एक ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से आप किसी के चेहरे से यह पता लगा सकते हैं की यह व्यक्ति कौन है। फेसिअल रिकग्निशन एक माध्यम है जिससे उसके डाटा से उसकी पहचान होती है। यह तकनीक आपको हर स्मार्टफोन में देखने को मिलेगी। अधिकतर लोग अब फिंगरप्रिंट लॉक के साथ साथ स्मार्ट फ़ोन में फेसिअल रिकग्निशन लॉक सिस्टम भी लगा रहे हैं। ऐसे ही ऑनलाइन चश्मा बेचने वाली कमपनी  भी घर बैठे फेसिअल रिकग्निशन की सहायता से लोगों को एप पर ही उनका 3डी  फेस बनाकर सही चश्मा ढूंढ़ने में मदद कर रही है। फेसिअल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर को पहले से ही बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। लोगों पर नज़र रखने और अपराधियों को पकड़ने के लिए या काफी मददगार साबित हुआ है। अब फेसिअल रिकग्निशन सिस्टम को देश में भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए उपयोग में लाने की तयारी की जा रही है।


कैसे करता है काम 

फेसिअल रिकग्निशन एक तरह का बायोमेट्रिक सिस्टम है। हमारे चहरे में कई तरह के बिंदु होते हैं जिन्हें नोडल पॉइंट कहते हैं। फेसिअल रिकग्निशन में 80 नोड्स पॉइंट होते हैं , जिनसे वह वह फेस प्रिंट बनाता है। पेमेंट करने के लिए इन्ही फेस प्रिंट का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए आपको बैंक अकाउंट से अपने चहरे को लिंक कराना पड़ता है। फेस के साथ आपका पूरा डाटा लिंक होता है। इसके बाद बिना कैश या क्यूआर कोड के दुकानदार अप्पके चहरा पॉइंट ऑफ़ सेल {पीओएस } मशीन जिसमें कैमरा होता है, की मदद से स्कैन करता है और ऑटोमेटिकली पैसे आपके अकाउंट से कट जाते हैं। 

फेसिअल रिकग्निशन सिस्टम इन चीन 

चीन में खरीदार बिना कॅश, बिना कार्ड, बिना वॉलेट और यहाँ तक की बिना स्मार्टफोन के शॉपिंग कर रहे हैं। लोग सिर्फ अपना चेहरा दिखाकर सामान खरीद रहे हैं। दरअसल चीन ने फेसिअल रिकग्निशन सिस्टम को अपना लिया है। जिसमें लोगो को सिर्फ अपना चेहरा स्कैन करना पड़ता है। इस तकनीक के बाद अब क्यूआर (क्विक रिस्पांस ) कोड भी पुराने जमाने की बात लगने लगी है। अब देखने वाली बात यह होगी की आज जब साइबर क्राइम इतना बड़ गया है तो, तो ट्रांजेक्शन करने का ये माध्यम कितना सुरक्षित साबित होगा। इसी तरह पासवर्ड याद करने का झंझट ख़त्म करने के लिए और ऑनलाइन शॉपिंग एक्सपीरियन्स को आसान बनाने के लिए मास्टर कार्ड ने आइडेंटिटी चेक एक्सप्रेस लॉन्च किया है। आइडेंटिटी चेक एक्सप्रेस  की मदद से अब ऑनलाइन शॉपिंग का पेमेंट चेहरा या अंगूठा दिखाकर किया जा सकता है। मास्टर कार्ड ने ऑनलाइन शॉपिंग में बढ़ते फ्रॉड से ग्राहकों को सुरक्षित पेमेंट का विकल्प दिया है। 


फेसिअल रिकग्निशन सिस्टम कितना सुरक्षित है।

फेसिअल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के अगर फायदे हैं तो कुछ नुक्शान भी हैं। पेमेंट करने के लिए यह एक बड़ा सॉफ्टवेयर है। इसके लिए हमें ज्यादा हार्डवेयर की जरूरत होती है। साथ ही आज कल की सबसे बड़ी समस्या डाटा सिक्योरिटी और प्राइवेसी की है। यह डाटा कहाँ स्टोर होगा पता नहीं। भले ही यह एक नई टेक्नोलॉजी है, लेकिन चेहरे को पहचान कर डाटा को इकट्ठा करने का यह सबसे असुरक्षित तरीका है। बिना सिक्योरिटी और प्राइवेसी क्या इस टेक्नोलॉजी पर भरोसा किया जा सकता है। 



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